खेल
गणतंत्र दिवस पर नई उड़ान: लद्दाख स्काउट्स भारत में आइस हॉकी को नई पहचान दिलाने को तैयार
jantaserishta.com
26 Jan 2026 11:39 AM IST

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लेह: देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ते भारत में आइस हॉकी का खेल भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके केंद्र में है इंडियन आर्मी की विशेष माउंटेन इन्फेंट्री रेजिमेंट—लद्दाख स्काउट्स। बर्फ से ढके पहाड़ों और कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा करने वाली यह रेजिमेंट भारत में आइस हॉकी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।
इस समय 2026 खेलो इंडिया विंटर गेम्स के छठे संस्करण का पहला चरण लेह (लद्दाख) में खेला जा रहा है। आइस हॉकी और आइस स्केटिंग जैसे खेलों में देश के बेहतरीन एथलीट हिस्सा ले रहे हैं। एक बार फिर, इन खेलों में लद्दाख स्काउट्स के प्रतिनिधि, यानी आर्मी की टीम, शानदार प्रदर्शन करते हुए अजेय नजर आ रही है। गणतंत्र दिवस के मौके पर आर्मी टीम पुरुषों के फाइनल में चंडीगढ़ से भिड़ेगी।
लद्दाख स्काउट्स का असली योगदान सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं है। आइस रिंक के बाहर उनकी सोच और कोशिशें कहीं ज्यादा अहम हैं। उनका सपना है कि आइस हॉकी को केवल लेह और लद्दाख तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे देश के मैदानों और तटीय इलाकों तक पहुंचाया जाए। वे चाहते हैं कि यह खेल पूरे भारत में पहचाना जाए और युवाओं के लिए एक नया विकल्प बने।
माना जाता है कि लद्दाख स्काउट्स ने 1970 के दशक के आखिर में आइस हॉकी खेलना शुरू किया था। उस समय न तो सही सतह थी और न ही आधुनिक उपकरण। सैनिक बर्फ पर फिसलते हुए इस खेल का आनंद लेते थे। 1980 के दशक के अंत में उन्होंने इसे गंभीरता से लेना शुरू किया। इस खेल के लिए जरूरी संसाधन विकसित किए गए और महंगे उपकरण मंगाए गए।
साल 2000 में जब लद्दाख स्काउट्स को एक पूर्ण इन्फेंट्री रेजिमेंट का दर्जा मिला, तब आइस हॉकी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और भी बढ़ गई। आज भारत में सिर्फ दो ओलंपिक-साइज आर्टिफिशियल आइस रिंक हैं—एक देहरादून में और दूसरा लेह के इनडोर नवांग दोरजे स्टोबदान स्टेडियम में।
2026 खेलो इंडिया विंटर गेम्स में हिस्सा ले रही आर्मी टीम के कप्तान पार्थ जगताप मानते हैं कि आइस हॉकी को लोकप्रिय बनाने के लिए देशभर में और रिंक बनाने की जरूरत है। उनके मुताबिक, अभी यह खेल ज्यादातर लेह तक सीमित है और अगर इसे आगे बढ़ाना है तो बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश की जरूरत होगी। उन्होंने खेलो इंडिया पहल की तारीफ करते हुए कहा कि मीडिया कवरेज और सरकारी सहयोग से इस खेल के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ी है।
पिछले साल लद्दाख स्काउट्स की ओर से भारतीय महिला आइस हॉकी टीम को आखिरी समय में दी गई फंडिंग बेहद अहम साबित हुई। इसी मदद से भारतीय महिला टीम ने यूएई में आयोजित आईआईएचएफ महिला एशिया कप में अपना पहला ब्रॉन्ज मेडल जीता।
आइस हॉकी का खेल महंगा है। पूरे आइस हॉकी गियर की कीमत चार लाख रुपये तक हो सकती है। आइस रिंक बनाना बेहद महंगा है। एक साधारण रिंक पर करीब 15 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। यही इस खेल की सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में इस खेल को देश में विकसित करने में कॉर्पोरेट जगत की भूमिका अहम हो जाती है।
लद्दाख स्काउट्स ने इस दिशा में पहल करते हुए कॉर्पोरेट सहयोग का विचार भी रखा है। सैनिक सिर्फ सीमाओं की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि कई बार वे समाज के लिए ऐसी जिम्मेदारियां भी उठा लेते हैं, जो उनकी ड्यूटी से कहीं आगे होती हैं। आइस हॉकी इसका बेहतरीन उदाहरण है।
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